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सरसों की फसल में आयरन की कमी के लक्षण

DeHaat | देहात

12-01-2021

सरसों की फसल को मुख्य पोषक तत्वों के साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी आवश्यकता होती है। पौधों के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों में से एक है आयरन यानी लोहा। पौधों में आयरन की कमी होने पर इसके लक्षण साफ नजर आने लगते हैं। यदि आप सरसों की खेती कर रहे हैं तो उच्च गुणवत्ता की फसल प्राप्त करने के लिए पोषक तत्वों की पूर्ति करना आवश्यक है। यहां से आप सरसों की फसल में आयरन की कमी के लक्षण एवं इसकी पूर्ति के तरीके जान सकते हैं।

क्या है आयरन की कमी के लक्षण?

  • आयरन की कमी सबसे पहले पौधों की नई पत्तियों पर नजर आते हैं।

  • शिराओं के बीच में पत्तियां पीली होने लगती हैं। पत्तियों की नसें हरी रहती हैं।

  • यदि समय रहते आयरन की पूर्ति नहीं की गई तो प्रभावित पौधों की नई पत्तियां हल्की पीली एवं सफेद होने लगती हैं।

  • नई कलिकाएं मरने लगती हैं।

  • पौधों के तने का उचित विकास नहीं होता है।

  • पौधों के विकास में बाधा आती है।

कैसे करें आयरन की पूर्ति?

  • गोबर की खाद एवं कम्पोस्ट खाद के प्रयोग से जैविक तरीके से मिट्टी में आयरन की पूर्ति की जा सकती है।

  • खड़ी फसल में आयरन की कमी के लक्षण नजर आने पर आयरन (Fe) युक्त उर्वरकों का प्रयोग करें।

  • 15 दिनों के अंतराल पर 2 बार फेरस सल्फेट का छिड़काव करें।

  • इसके अलावा 15 लीटर पानी में 5 ग्राम देहात एजी वाइटल मिला कर छिड़काव करें। इसके प्रयोग से आयरन के साथ बोरोन, कॉपर, मैंगनीज, जिंक और मॉलीबेड़नुम की कमी भी पूरी होगी।

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mustard | सरसों

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