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मेंथा की फसल में खरपतवारों पर नियंत्रण के सटीक उपाय

DeHaat | देहात

29-04-2021

खरपतवारों की अधिकता से मेंथा की फसल पर प्रतिकूल असर होता है। खरपतवार होने पर फसल की गुणवत्ता कम हो जाती है। इसके साथ ही मेंथा में तेल की मात्रा में भी कमी आती है। ऐसे में अगर आप मेंथा की खेती कर रहे हैं तो समय रहते खरपतवारों पर नियंत्रण करना आवश्यक है। ऐसे में मेंथा की फसल में खरपतवारों पर नियंत्रण के तरीके यहां से देख सकते हैं।

  • निराई-गुड़ाई : खरपतवार पर नियंत्रण के लिए निराई-गुड़ाई करना सबसे आसान तरीका है। खरपतवारों पर नियंत्रण के लिए कुछ समय के अंतराल पर आवश्यकता के अनुसार 2 से 4 बार निराई-गुड़ाई करें।

  • रासायनिक नियंत्रण : प्रति एकड़ भूमि में 280 से 320 लीटर पानी में 1.32 लीटर पेंडीमेथलीन मिला कर छिड़काव करें।

  • सकरी पत्ती के खरपतवार पर नियंत्रण : दूब, सवां, मकड़ा घास, सुनहरी घास, गुज घास, बंचरी, चिनियारी आदि सकरी पत्ती के खरपतवारों पर नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ खेत में 150 से 200 लीटर पानी में 400 से 500 मिलीलीटर अदामा का एजिल मिला कर छिड़काव करें। इसके प्रयोग से मेंथा के पौधों में किसी तरह की हानि नहीं होती।

  • चौड़ी पत्ती के खरपतवार पर नियंत्रण : चौड़ी पत्ती के खरपतवार जैसे मोथा घास पर नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ खेत में 100 मिलीलीटर आईपीएल सफर का छिड़काव करें। इसके प्रयोग के समय खेत में पर्याप्त मात्रा में नमी होना आवश्यक है।

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mentha | मेंथा / पुदीना

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