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कुंदरी की खेती की सम्पूर्ण जानकारी

DeHaat | देहात

30-04-2021

कुंदरी लताओं वाली सब्जियों में शामिल है। विटामिन ए और विटामिन सी से भरपूर कुंदरी की खेती छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार एवं कर्नाटक में की जाती है। कम ठंड वाले क्षेत्रों में इसका उत्पादन पूरे वर्ष होता है। वहीं अधिक ठंड वाले क्षेत्रों में 7 से 8 महीनों तक फल प्राप्त किए जा सकते हैं। आइए कुंदरी की बेहतर पैदावार के लिए मिट्टी, जलवायु, खेत तैयार करने की विधि, रोपाई की विधि, आदि महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त करें।

मिट्टी एवं जलवायु

  • इसकी खेती लगभग सभी किस्मों की मिट्टी में भी सफलतापूर्वक की जा सकती है।

  • कार्बनिक पदार्थ युक्त बलुई दोमट इसकी खेती के लिए सर्वोत्तम है।

  • इसके अलावा लवणीय मिट्टी मिट्टी में भी इसकी खेती की जा सकती है।

  • मिट्टी का पी.एच. स्तर 7 होना चाहिए।

  • इसकी खेती के लिए गर्म एवं आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है।

  • अधिक उत्पादन के लिए 30 से 35 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान उपयुक्त है।

खेत की तैयारी एवं उर्वरक की मात्रा

  • खेत तैयार करते समय सबसे पहले 1 बार गहरी जुताई करें। इससे खेत में पहले मौजूद फसलों के अवशेष एवं खरपतवार नष्ट हो जाएंगे।

  • इसके बाद 3 से 4  बार हल्की जुताई कर के खेत की मिट्टी को भुरभुरी बना लें।

  • अच्छी फसल के लिए खेत तैयार करते समय प्रति एकड़ खेत में 4 से 5 टन गोबर की खाद मिलाएं।

  • इसके साथ ही प्रति एकड़ खेत में 40 किलोग्राम यूरिया, 70 किलोग्राम डी.ए.पी. एवं 16 किलोग्राम एम.ओ.पी. मिलाएं।

  • पौधों की कटिंग लगाने के लिए खेत में 60 सेंटीमीटर चौड़े गड्ढे तैयार करें।

रोपाई की विधि

  • कुंदरी की व्यावसायिक खेती पौधों की कटिंग लगा कर की जाती है। इसकी खेती बीज के द्वारा नहीं की जाती है।

  • रोपाई के लिए 15 से 20 सेंटीमीटर लम्बी एवं 1.5 से 2 सेंटीमीटर मोटी कटिंग का चयन करें।

  • पहले से तैयार किए गए गड्ढों में पौधों के कटिंग की रोपाई करें।

  • पौधों से पौधों की दूरी 2 मीटर होनी चाहिए।

  • कुंदरी बेल वाली फसल है इसलिए पौधों को सहारा देना आवश्यक है। पौधों को सहारा देने के लिए खेत में बांस के टुकड़े लगाएं।

सिंचाई एवं खरपतवार नियंत्रण

  • पौधों की रोपाई के बाद प्रारंभिक अवस्था में खरपतवारों पर नियंत्रण करना आवश्यक है।

  • खरपतवार पर नियंत्रण के लिए 2 से 3 बार निराई-गुड़ाई करें। इससे पौधों की जड़ों में वायु संचार भी सुचारु रूप से होगा।

फलों की तुड़ाई

  • पौधों की रोपाई के करीब 45 से 50 दिनों बाद फलों की पहली तुड़ाई की जा सकती है।

  • इसके बाद हर 4-5 दिनों के अंतराल पर फलों की तुड़ाई करते रहें।

  • एक बार पौधों को लगाने के बाद 4-5 वर्षों तक कुंदरी के फल प्राप्त किए जा सकते हैं।

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ivy gourd | कुंदरी

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