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मिर्च के पौधों में लगने वाले कुछ प्रमुख कीट, ऐसे करें नियंत्रण

DeHaat | देहात

20-07-2021

कई ऐसे कीट हैं जिनके प्रकोप के कारण मिर्च की फसल को भारी नुकसान होता है। जिनमे फल छेदक कीट, थ्रिप्स एवं अन्य रस चूसक कीट शामिल हैं। समय रहते इन कीटों पर नियंत्रण करना आवश्यक है। लेकिन कई बार सही जानकारी नहीं होने के कारण किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ता है। आइए इस पोस्ट के माध्यम से हम मिर्च की फसल में लगने वाले विभिन्न कीटों से होने वाले नुकसान एवं नियंत्रण के तरीकों पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

कुछ प्रमुख कीट

  • पत्ती सुरंगी कीट : इसे लीफ माइनर कीट के नाम से भी जाना जाता है। यह कीट सबसे पहले कोमल पत्तियों के हरे पदार्थ को खुरच कर खाते हैं। जिससे पत्तियों पर टेढ़े-मेढ़े सुरंग नजर आने लगते हैं। इस कीट का प्रकोप बढ़ने पर पत्तियां कमजोर हो कर गिरने लगती हैं और पौधों के विकास में बाधा आती है। इस कीट पर नियंत्रण के लिए एकड़ खेत में 150 लीटर पानी में 50 मिलीलीटर देहात कटर मिला कर छिड़काव करें। इसके अलावा प्रति लीटर पानी में 1 मिलीलीटर इमिडाक्लोप्रिड मिलाकर भी छिड़काव कर सकते हैं।

  • थ्रिप्स : इसे तैला कीट भी कहा जाता है। यह कीट पत्तियों एवं पौधों के अन्य नरम हिस्सों के रस चूसते हैं। जिससे पत्तियां ऊपर की तरफ मुड़ने लगती हैं। प्रकोप बढ़ने पर पौधों का विकास रुक जाता है। थ्रिप्स के प्रकोप को कम करने के लिए प्रति लीटर पानी में 1 मिलीलीटर इमिडाक्लोप्रिड मिला कर छिड़काव करें।

  • फल छेदक कीट : यह कीट पत्तों और फलों में छेद कर के फसल को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। फलूबैंडीआमाइड 20 डब्लू डी जी 6 ग्राम को प्रति 10 लीटर पानी में डालकर स्प्रे करने से इस कीट से निजात मिल सकता है।

  • सफेद मक्खी : यह मक्खियां पौधों का रस चूस कर उन्हें कमजोर बना देती हैं। जिससे पौधों के विकास में बाधा आती है। प्रभावित पौधों में फूल-फल कम निकलते हैं। इस कीट पर नियंत्रण के लिए प्रति लीटर पानी में प्रोफैनोफॉस 2 मिलीलीटर या ट्राइज़ोफॉस 2.5 मिलीलीटर मिला कर छिड़काव करें। आवश्यकता होने पर 15 दिनों के अंतराल पर 2 से 3 बार इन दवाओं का छिड़काव करें।

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हमें उम्मीद है यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। इस पोस्ट में बताई गई दवाओं को अपना कर आप आसानी से मिर्च के पौधों को विभिन्न कीटों से बचा सकते हैं। यदि आपको यह जानकारी पसंद आई है तो इस पोस्ट को लाइक करें। साथ ही इसे अन्य किसानों के साथ साझा भी करें। जिससे अन्य किसानों तक भी यह जानकारी पहुंच सके। इससे जुड़े अपने सवाल हमसे कमेंट के माध्यम से पूछें।

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chilli | मिर्च

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